बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाओं से सिंचाई के अतिरिक्त बाढ़ नियंत्रण, पेयजल आपूर्ति, जलविद्युत उत्पादन, नहरी परिवहन, पर्यटन आदि अनेक कार्य किये जा सकते हैं। इसीलिए जवाहर लाल नेहरू ने बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं को भारत का मन्दिर एवं नये तीर्थ कहा था।
वर्तमान समय में यद्यपि इन परियोजनाओं की प्रासंगिकता पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं; फिर भी सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, जल विद्युत उत्पादन आदि के लिए व्यापक संभावनाओं को देखते हुए इनके महत्व को अनदेखा नहीं किया जा सकता है।
भारत में जल विद्युत संयंत्र की स्थापना सर्वप्रथम 1897 ई. में पश्चिम बंगाल में दार्जलिंग के निकट सिद्रापोंग अथवा सिद्राबाग में हुई थी।
भारत की प्रमुख बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं
◆परियोजना नदी राज्य
●कोसी कोसी बिहार
●फरक्का हुगली प. बंगाल
●मयूराक्षी मयूराक्षी प. बंगाल
●जवाई जवाई राजस्थान
●राणा प्रताप सागर चम्बल राजस्थान
●जवाहर सागर चम्बल राजस्थान
●हीराकुंड महानदी उड़ीसा
●बालीमेला सिलेरू उड़ीसा
●कुल्सी कुल्सी असम
●कोपली कोपली नदी असम
●इडुक्की पेरियार केरल
●पल्लीवासल मंदिरा पूंझा केरल
●सबरिगिरी पम्बा केरल
●तिस्ता परि. तिस्ता सिक्किम
●रंजीत परि. रंजीत नदी सिक्किम
●तिपाईमुख बराक मणिपुर
●लोकटक इम्फाल नदी मणिपुर
●स्वर्णरेखा स्वर्णरेखा झारखण्ड
●पेरियार पेरियार तमिलनाडु
●मैत्तूर कावेरी तमिलनाडु
●तुझबाई तुझबाई मिजोरम
●पापलाशस ताम्रपर्णी तमिलनाडु
●पायकारा पायकारा तमिलनाडु
●दोयांग दोयांग नागालैंड
●चुटक सुरू नदी लद्दाख
●कर्दमकुलाई -- मेघालय
●कलिंग पोंग -- अंडमान निकोबार
उत्तर प्रदेश में स्थित बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं
◆परियोजना सम्बन्धित नदी
●रामगंगा रामगंगा
●रिहन्द रिहन्द
●चिबरो टोंस
●चिल्ला चिल्ला नदी
●माताटीला बांध बेतवा
●लक्ष्मीबाई सागर बांध बेतवा
●शारदा शारदा नदी
●गोविन्दबल्लभ पंत सागर रिहन्द
●राजघाट बेतवा
उत्तराखंड में स्थित बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं
◆परियोजना सम्बन्धित नदी
●टिहरी भागीदारी
●धौली गंगा धौली गंगा व गौरी गंगा
●लखवर व्यासी यमुना
●विष्णुगढ़ पीपलकोटी अलकनन्दा
●कोटेश्वर भागीरथी
●टकनपुर काली नदी
●बाककांग बालिंग धौली गंगा
●किशाऊ बांध टोंस
●मलेरी झेलम धौली गंगा
●गोहना ताल विरही गंगा
●झेलम तमक धौली गंगा
●करमोली जाड़ गंगा
●काठी बांध रामगंगा
मध्य प्रदेश में स्थित बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं
◆परियोजना सम्बन्धित नदी
●तवा तवा
●बाण सागर सोन
●बारगी बारगी
●नर्वदा सागर नर्वदा
●इंदिरा सागर नर्वदा
●गांधी सागर चम्बल
●माहेश्वर नर्वदा
●ओंकारेश्वर नर्वदा
●पेंच पेंच
●संजय सरोवर वेन गंगा
●थांवर सिंचाई थांवर
●रानी अवन्तिबाई सागर दरगी
●रविशंकर सागर महानदी
हिमाचल प्रदेश में स्थित बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं
◆परियोजना सम्बन्धित नदी
●जवाई जवाई
●नापथा-झाकरी सतलज
●खाव स्पीति
●चमेरा रावी
●रनपुर सतलज
●पार्वती पार्वती
●कोलडेम सतलज
जम्मू कश्मीर में स्थित बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं
◆परियोजना सम्बन्धित नदी
●उझ उझ नदी
●निम्मो बाजगो सुरू
●तुलबुल झेलम
●बगलिहार चिनाव
●उरी झेलम
●सलाल चिनाव
●बुरसर चिनाव
●दुलहस्ती चिनाव
●किशन गंगा किशन गंगा
कर्नाटक में स्थित बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं
◆परियोजना सम्बन्धित नदी
●तुंगभद्रा तुंगभद्रा
●काली नदी परि. काली
●अल्माटी कृष्णा
●शरावती शरावती
●घाट प्रभा घाट प्रभा
●भद्रा भद्रा
●शिव समुद्रम कावेरी
●मलप्रभा मलप्रभा
●हिडकल घटप्रभा
●कालिन्दी कालिन्दी
आंध्र प्रदेश में स्थित बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं
◆परियोजना सम्बन्धित नदी
●लोवर एवं अपर विलेरू सिलेरू
●मचकुंड मचकुंड
●पोचम पाद गोदावरी
●निजाम सागर मंजरी
●श्रीसेलम कृष्णा
●नागार्जुन सागर कृष्णा
●रामगुंडम गोदावरी
अरुणाचल प्रदेश में स्थित बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं
◆परियोजना सम्बन्धित नदी
●अपर लोहित लोहित
●तबांग तबांग
●दिबांग दिबांग
●रंगानदी परि. रंगानदी
●अपर सियांग सियांग
●कामेंग कामेंग
महाराष्ट्र में स्थित बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं
◆परियोजना सम्बन्धित नदी
●जायकवाड़ी गोदावरी
●गिरना गिरना
●कोयना कोयना
●भीमा प्रथम पवना
●भीमा द्वितीय पवना
●कुकांडी कुकांडी
●छोम बांध कृष्णा
●ऊपरी पेनगंगा कृष्णा
●पूर्णा पूर्णा
गुजरात में स्थित बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं
●परियोजना सम्बन्धित नदी
●उकाई ताप्ती
●माही माही
●साबरमती परि. साबरमती
●पनाम पनाम
●करजन करजन नदी
●काकरापार ताप्ती
●कदाना माही
पंजाब में स्थित बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं
◆परियोजना सम्बन्धित नदी
●पोंग व्यास
●भाखड़ा नांगल सतलज
●शाहपुर कांदी रावी
●देहर व्यास
●रंजीत सागर बांध रावी
●व्यास परि. व्यास
●थीन बांध रावी
दामोदर घाटी परियोजना
यह स्वतंत्र भारत की पहली बहुउद्देश्यीय परियोजना है। इस परियोजना की रूप रेखा संयुक्त राज्य अमेरिका की टेनिसी वैली अथॉरटी के आधार पर की गई थी। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए एक दामोदर घाटी निगम की स्थापना वर्ष 1948 में कई गयी।
दामोदर घाटी परियोजना के अंतर्गत तिलैया, कोनार, मैथान व पंचेत हिल पर बांध बनाये गये हैं, जबकि बोकारो, दुर्गापुर, चंद्रपुर एवं पतरातू में ताप विद्युत गृहों का निर्माण किया गया है।
●मैथान बांध-- यह बांध दामोदर की सहायक बराकर नदी पर बनाया गया है। यह एक मिट्टी का बांध है। इसका निर्माण वर्ष 1958 में पूरा किया गया।
●बेलपहाड़ी बांध-- यह बांध भी बराकर नदी पर बनाया गया है।
●तिलैया बांध-- यह बांध हजारीबाग जिले में बराकर नदी पर बनाया गया है। इसका निर्माण कार्य 1953 में पूरा किया गया।
उपर्युक्त तीनों बांध दामोदर नदी घाटी परियोजना के प्रथम चरण में बनाये गये।
●कोनार बांध-- यह बांध हजारीबाग जिले में दामोदर की सहायक कोनार नदी पर बनाया गया है। इसका निर्माण वर्ष 1955 में हुआ था। यह बांध बोकारो विद्युत संयंत्र को जल उपलब्ध कराता है।
●पंचेत हिल बांध-- यह बांध दामोदर नदी पर मान भूमि जिले में बनाया गया है।
दामोदर नदी, हुगली की प्रमुख सहायक नदी है। यह छोटानागपुर की पहाड़ियों से निकलकर पश्चिम बंगाल में हुगली से मिल जाती है। दामोदर नदी में आने वाली बाढ़ों एवं प्रदूषण के कारण इसे बंगाल का शोक कहा जाता था। देश के कुल कोयला भण्डार का 60% दामोदर घाटी में ही पाया जाता है।
भाखड़ा-नांगल परियोजना
भाखड़ा-नांगल बहुउद्देश्यीय परियोजना पंजाब, हरियाणा और राजस्थान का संयुक्त उपक्रम है। इसके अंतर्गत भाखड़ा और नांगल नामक स्थानों के समीप सतलज नदी पर दो बांधों का निर्माण किया गया है। जिन्हें संयुक्त रूप से भाखड़ा-नांगल बांध कहते हैं। यह देश की सबसे बड़ी बहुउद्देश्यीय परियोजना है।
भाखड़ा बांध संसार का सबसे ऊंचा गुरुत्वीय बांध है। जिसका निर्माण 1963 में किया गया। इसकी ऊंचाई 266 मी. है। बांध के पीछे एक झील बनी है जिसे गोविन्द सागर झील कहा जाता है। नांगल नामक स्थान पर दूसरा बांध बनाया गया है।
भाखड़ा-नांगल बांध का लाभ हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व दिल्ली को मिलता है।इस बांध का जल संग्रहण गोविन्द सागर झील में किया जाता है।
नर्मदा घाटी परियोजना
नर्मदा भारत की पंचमी सबसे बड़ी नदी है। यह पश्चिम की ओर प्रवाहित होने वाली नदियों में देश की सबसे लम्बी नदी है।
नर्वदा बेसिन में सिंचाई, विद्युत उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण का विचार सर्वप्रथम 1945-46 में प्रस्तुत किया गया था।
इस परियोजना के अंतर्गत नर्वदा और उसकी सहायक नदियों पर 29 बड़े, 135 मध्यम तथा 3 हजार छोटे बांध तथा बैराज बनाने की घोषणा की गयी थी। 30 बड़े बांधों में से 6 बहुउद्देश्यीय, 5 जलविद्युत व 19 सिंचाई बांध हैं। जिसमें सरदार सरोवर बांध व नर्वदा सागर बांध महत्वपूर्ण हैं।
◆सरदार सरोवर परियोजना
यह परियोजना मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात व राजस्थान की संयुक्त परियोजना हैं। इसके अंतर्गत गुजरात के भड़ूच जिले में नवगांव के निकट नर्वदा नदी पर 138.68 मीटर ऊंचे एक बांध का निर्माण किया गया है।
इस बांध से 82 लाख टन अतिरिक्त खाद्यान का उत्पादन होने का अनुमान है। 132 नगरों तथा 8720 गांवो में पेयजल की उपलब्धता होगी। 4650 हेक्टेअर से अधिक भूमि पर वृक्षारोपण होगा। लगभग 4 लाख व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा तथा पशुपालन व दुग्ध व्यवसाय को प्रोत्साहन मिलेगा।
सरदार सरोवर बांध से 1450 मेगावाट जलविद्युत का उत्पादन किया जा सकेगा। इस बांध से गुजरात के 17.92 हेक्टेअर क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा मिलने से गुजरात को सर्वाधिक लाभ होगा। यद्यपि इस परियोजना से कुल उत्पादित विद्युत का 57% भाग मध्य प्रदेश को मिलेगा।
सरदार सरोवर परियोजना से लाभान्वित होने वाले राज्यों में गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश शामिल हैं।
इस बांध के निर्माण से 200 गांव डूब सकते हैं, लगभग 15 लाख लोग विस्थापित होंगे तथा 39 हजार हेक्टेअर भूमि जल मग्न हो सकती है।
सरदार सरोवर परियोजना का विरोध करने के लिए फरवरी 1986 में मेधा पाटकर ने धारंग राष्ट्र समिति की स्थापना की थी। 1989 में इसी का नाम बदलकर नर्मदा बचाओ आंदोलन किया गया।
◆नर्मदा सागर परियोजना
इसे इंदिरा सागर बांध भी कहते हैं। इस परियोजना की आधारशिला अक्टूबर 1984 में रखी गयी थी। यह बांध मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है। इससे 1000 मेगावाट विद्युत उत्पादन तथा 1.23 लाख हेक्टेअर भूमि की सिंचाई का लक्ष्य है।
रिहन्द बांध परियोजना
यह उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में पिपरी नामक स्थान पर रिहन्द नदी पर निर्मित है। यहां पर 934 मी. लम्बा तथा 91 मी. ऊंचा एक बांध बनाया गया है। इस बांध के नीचे ओबरा में 300 मेगावाट क्षमता का एक जलविद्युत संयंत्र स्थापित किया गया है।
इस बांध के पीछे गोविन्द बल्लभ पंत सागर नामक एक कृत्रिम झील बनायी गयी है। जो भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है।
रिहन्द परियोजना उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी परियोजना है। इसे गोविन्द बल्लभ पंत सागर परियोजना भी कहते हैं।
हीराकुंड परियोजना
यह उड़ीसा राज्य में महानदी पर बनाई गई एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसका निर्माण 1948 में शुरू हुआ और 1956-57 के दौरान पूरा हुआ।
हीराकुंड बांध के निर्माण से पूर्व अपनी भयंकर बाढ़ों के कारण उड़ीसा का शोक कहलाती थी।
हीराकुंड बांध 61 मीटर ऊंचा तथा 4801 मीटर लम्बा बांध है। यह संसार का सबसे लंबा बांध है। इस बांध से लगभग 10 लाख हेक्टेअर की सिंचाई होती है।
महानदी पर हीराकुंड, तिकरपाड़ा तथा नराज बांध बनाये गये हैं। इनमें हीराकुंड प्रमुख बांध है। यह बांध बाढ़ों की पुनरावृत्ति के कारण गाद की समस्या से ग्रस्त हो गया है। जिससे इसकी जल भण्डार क्षमता घट गयी है।
गंडक परियोजना
यह उत्तर प्रदेश तथा बिहार का संयुक्त प्रयास है। दिसम्बर 1959 में भारत सरकार से समझौते द्वारा नेपाल भी इसमें शामिल हो गया। इस परियोजना के तहत गंडक नदी पर वाल्मीकि नगर में 1968-69 में एक बैराज बनाया गया, जिसका उद्देश्य नेपाल, उत्तर प्रदेश और बिहार में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था।
इसके चार नहरें दो भारत तथा दो नेपाल में निकली गयी। एक 15 मेगावाट का विद्युत गृह जो नेपाल के तराई क्षेत्र की विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति करता है स्थापित किया गया।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना
यह विश्व की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना है। इसका उदघाटन 30 मार्च 1958 में किया गया था। यह राजस्थान के शुष्क तथा अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराती है।
सतलुज और व्यास नदी के संगम पर हरिके बैराज निर्मित है यही से राजस्थान फीडर नहर निकाली गयी है। जो इंदिरा गांधी नहर को जल प्रदान करती है।
649 किमी. लम्बी इंदिरा गांधी नहर उत्तर पश्चिमी राजस्थान के गंगा नगर, बीकानेर, जैसलमेर तथा बाड़मेर जिला की लगभग 14.5 लाख हेक्टेअर भूमि को सिंचित करती है।
इंदिरा गांधी नहर ने थार मरुस्थल को हरियाली में बदल दिया है। इससे इन क्षेत्रों में कपास जैसी वाणिज्यिक फसलों तथा चारा उगाने में सफलता मिली है।
पशु आधारित उद्योगों का विकास, अतिरिक्त खाद्यान्न, पेयजल की उपलब्धता तथा मरुस्थल के प्रसार में नियंत्रण आदि इस परियोजना के अन्य लाभ हैं।
चम्बल परियोजना
चम्बल नदी के जल का उपयोग करने के लिए मध्य प्रदेश व राजस्थान की यह संयुक्त परियोजना है। इसके अंतर्गत मध्य प्रदेश में गांधी सागर बांध तथा राजस्थान में राणा प्रताप सागर बांध, जवाहर सागर बांध और कोटा बैराज बनाये गये हैं। इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य चम्बल नदी की द्रोणी में मृदा का संरक्षण करना है।
गांधी सागर बांध इस परियोजना का प्रथम बांध है। यह मध्य प्रदेश के मन्दसौर जिले में स्थित 62.17 मीटर ऊंचा बांध है। इसका निर्माण कार्य 1960 में पूरा हुआ था।
नागार्जुन सागर बांध
नागार्जुन सागर बहुउद्देश्यीय परियोजना तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश की सीमा पर कृष्णा नदी पर स्थित है। बौद्ध भिक्षु नागार्जुन के नाम पर इसका नाम नागार्जुन सागर रखा गया। इसके माध्यम से नालगोंडा, प्रकाशम, खम्मम और गुंटूर जिलों में सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध होगी।
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नागार्जुन सागर बांध की ऊंचाई 124 मीटर है। इसके 11 जलाशयों में 472 क्यूबिक मीटर पानी भंडारण की क्षमता है। इस बांध से 210 मेगावाट विद्युत का भी उत्पादन किया जाता है।
टिहरी बांध परियोजना
टिहरी बांध का निर्माण उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय क्षेत्र में भागीरथी तथा भिलंगना के संगम स्थल से 1.5 किमी नीचे टिहरी जिले में किया गया है। यह विश्व का सबसे ऊंचा चट्टान आपूरित बांध है।
टिहरी बांध का मुख्य उद्देश्य भागीरथी एवं भिलंगना नदियों का अतिरिक्त जल संग्रहण कर सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण एवं विद्युत उत्पादन करना है। इसके अतिरिक्त इससे मत्स्य पालन व नहरी परिवहन भी हो सकेगा।
इस परियोजना के प्रथम चरण में 1000 मेगावाट तथा द्वितीय चरण में 1400 मेगावाट अर्थात कुल 2400 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होगा।
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टिहरी बांध भूकम्प प्रवण क्षेत्र में आता है। इसके निर्माण के लिए टिहरी जलविद्युत विकास निगम की स्थापना की गयी है।
तुंगभद्रा बांध
यह दक्षिण भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देश्यीय परियोजना है। इसे आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक राज्य के सहयोग से कृष्णा की सहायक तुंगभद्रा नदी के तट पर मल्लपुरम के निकट बनाया गया है।
तुंगभद्रा बांध के जल को कृत्रिम रूप से निर्मित पम्पा सागर नामक जलाशय में एकत्रित किया जाता है। इससे 3 नहरें निकाली गयी हैं, जिनसे 6 लाख हेक्टेअर भूमि की सिंचाई होती है।
मयूराक्षी बांध परियोजना
इसे कनाडा बांध भी कहा जाता है। इससे पश्चिम बंगाल तथा झारखंड दोनों राज्य लाभान्वित होते हैं। यह बांध मयूराक्षी नदी पर मेंसजोर नामक स्थान पर बनाया गया है। इससे 4000 किलोवॉट जलविद्युत का उत्पादन किया जाता है।
◆नाप्था-झाकरी परियोजना हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में सतलज नदी पर स्थित है। यह एशिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है।
◆चुटक पनबिजली परियोजना कारगिल जिले में स्थित है। इसे शुरू नदी पर बनाया गया है। इससे 44 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो सकेगा।
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◆उकाई, गुजरात राज्य की प्रमुख बहुउद्देश्यीय परियोजना है। यह ताप्ती नदी पर बनाई गई है। इस नदी पर उकाई नामक स्थान पर 4928 मीटर लम्बा तथा 69 मीटर ऊंचा एक बांध बनाया गया है। इससे निकलने वाली नहरों से लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। उकाई बांध से 300 मेगावाट विद्युत का उत्पादन भी होता है।
◆दांतेवाड़ा परियोजना गुजरात राज्य में बनास नदी पर दांतेवाड़ा नामक स्थान पर निर्मित की गयी है। इससे 1 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है तथा 1000 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होता है।
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